अमेरिकी राजनीति में टैरिफ को लेकर घमासान और तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद कड़े तेवर दिखाते हुए सभी देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त वैश्विक टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है। ट्रंप ने साफ कहा कि वह आज ही एक नया कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा आज मैं धारा 122 के तहत 10% वैश्विक टैरिफ लगाने का आदेश साइन करूंगा। यह पहले से वसूले जा रहे सामान्य शुल्कों के अतिरिक्त होगा।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रशासन धारा 301 समेत अन्य प्रावधानों के तहत कई जांच प्रक्रियाएं शुरू कर रहा है, ताकि अमेरिका को अन्य देशों और कंपनियों की कथित अनुचित व्यापारिक नीतियों से बचाया जा सके।
अमेरिका को फिर से महान बनाना है
राष्ट्रपति ने दोहराया कि उनका लक्ष्य अमेरिका को फिर से महान बनाना है और इसके लिए सख्त व्यापारिक नीति जरूरी है। उन्होंने कहा कि टैरिफ अमेरिकी उद्योगों और श्रमिकों की रक्षा का मजबूत हथियार है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि एक रास्ता बंद होता है तो उनके पास अन्य विकल्प मौजूद हैं। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला अमेरिका के हित में नहीं है और सरकार आगे की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है।
भारत पर पूर्ववर्ती शुल्क के साथ 10 फीसदी टैरिफ
ट्रंप ने फैसले के बाद एलान किया, आपात शक्तियों के तहत लगाए टैरिफ के स्थान पर अगले 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 फीसदी का वैश्विक शुल्क लगेगा। ट्रंप ने कहा, यह आदेश व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत जारी होगा और इसी कानून के तहत लागू मौजूदा शुल्कों के अतिरिक्त होंगे। उन्होंने कहा कि यह टैरिफ पहले से लगाए जा रहे बेसलाइन टैरिफ के ऊपर होगा। यानी जो टैरिफ अभी लिया जा रहा है, उसके अलावा यह नया 10% एक्स्ट्रा टैरिफ होगा। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारत को भी यह 10% टैरिफ देना होगा और यह तब तक लागू रहेगा जब तक कोई अन्य कानूनी प्रावधान लागू नहीं किया जाता।
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इससे पहले 20 फरवरी 2026 को अदालत ने ट्रंप के व्यापक वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया, जिससे उनकी आर्थिक नीतियों को बड़ा झटका लगा। इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी दलीलों को सही तरह से नहीं सुना गया। उन्होंने फैसले को निराशाजनक और हतोत्साहित करने वाला बताया। ट्रंप ने यहां तक कहा कि उन्हें ऐसे निर्णय की उम्मीद नहीं थी और फैसला सुनाने वाले कुछ जजों के रवैये पर भी सवाल उठाए।
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